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🚩🚩 भारतीय संस्कार 🚩🚩

🚩🚩 भारतीय संस्कार 🚩🚩


संस्कार क्या हैं।

सोलह संस्कार क्या है।

संस्कारों का महत्व क्या है।

भारतीय संस्कृति को महान क्यों कहते हैं।

वैदिक शिक्षा जरूरी क्यों?

यह संस्कारों की माला आपके लिए……
आज से…🚩🚩


प्राचीन काल से ही ईश्वर, धर्म, उपासना,यज्ञ और कर्मकांड के प्रति मनुष्य की अटल आस्था रही है। मनुष्य जन्म को पहले से ही दुर्लभ माना गया है। क्योंकि मनुष्य को प्रगल्भ बुद्धि की देन भगवान द्वारा दिया गया रत्न है। सभी जन्मों के कर्मों को भोगने के लिए ही मानव जन्म मिलता है। अन्यथा बाकी किसी भी योनि में कर्मों के भोग नहीं मिटते।
इस मनुष्य जीवन को संस्कारों से सिंचना जरूरी होता है, अन्यथा वह बिना लगाम के घोडे की तरह अंधाधुंध भागता है। यह संस्कार सारी पृथ्वी पर सिर्फ भारत देश के ऋषियों ने ही वेदों में निरुपित किये है। अन्य देशों में तो यह कदापि देखने को नहीं मिलती। इसीलिए सारा विश्व भारतीय संस्कृति का मुरीद है, क्योंकि यह देवभूमि है। यूं ही नहीं वेदो का निर्माण यहा हुआ।*कुछ तो शक्ति है कि कितना भी कोशिश करो मिटाने की, संस्कृति मिटती नहीं हमारी।


संस्कारों का मनुष्य जीवन के साथ संबंध गर्भावस्था से लेकर मृत्यु पर्यन्त सदैव बना रहता है।अंत: समय समय पर जन्म से लेकर मृत्यु तक नाना प्रकार की सांसारिक प्रक्रियाएं मानव जीवन के साथ अपना संबंध स्थापित कर समाज में प्रतिष्ठा को प्राप्त किए हुए हैं। इन संस्कारों का प्रभाव आज भी मानवीय जीवन में स्पष्ट परिलक्षित होता है।
संस्कार:
अर्थात भूषित,अलंकृत करने के लिए अथवा सूंदर व्यवस्थित, गुणवान एवं सुदृढ़ बनाने के लिए या सजाने और सॅवारने के लिए अथवा दोषों को दूर करके गुणों का आधान करने के लिए किया जाने वाला कर्म, क्रिया, विधि, पद्धति या कार्य संस्कार कहलाता है।

महर्षि जैमिनी प्रणीत ‘द्रव्यगुणसंस्कारेषुबादरि:’ (३/१/३) सूत्र के भाष्य में श्रीशबरपादमहाभागने संस्कार को परिभाषित करते हुए कहा है – ‘संस्कारो नाम स भवति यस्मिञ्जाते पदार्थों भवति योग्य: कस्चिदर्थस्य’ अर्थात संस्कार वह होता है, जिसके उत्पन्न होने पर पदार्थ किसी प्रयोजन के लिए योग्य होता है।

#आचार्य चरक कहते हैं ‘संस्कारो ही गुणान्तराधानमुच्यते’ अर्थात् दुर्गुणों, दोषों का परिहार तथा गुणों का परिवर्तन करके भिन्न एवं नये गुणों का आधान करने का नाम संस्कार है।

तन्त्रवार्तिककार श्रीभट्टपाद के अनुसार संस्कार वे क्रियाएं तथा रीतियां हैं,जो योग्यता प्रदान करती है – “योग्यतां चादधाना: क्रिया: संस्काराइत्युच्यन्ते।” अर्थात संस्कार वे क्रियाएं तथा रीतिया हैं, जो योग्यता प्रदान करती है।

वीरमित्रोदय में संस्कार की परिभाषा इस प्रकार की गयी है – यह एक विलक्षण योग्यता है,जो शस्त्र विहित क्रियाओं के करने से उत्पन्न होती है। वह योग्यता दो प्रकार की है।
१) जिसके द्वारा व्यक्ति अन्य क्रियाओं के योग्य हो जाता है।
यथा- उपनयन संस्कार से वेदारम्भ होता है।
२) दोष से मुक्त हो जाता है।
यथा- जातकर्म संस्कार से वीर्य एवं गर्भाशय का दोषमोचन होता है।
मनुष्य माता के गर्भ से शिशु के रूप मे जब जन्म लेता है,तब वह अपने साथ दो प्रकार के संस्कारो को लेकर आता है।
१) वह संस्कार जिन्हें हम जन्म- जन्मान्तरों से अपने साथ लेकर आते हैं।
२) वह संस्कार जिन्हें वह अपने माता-पिता से संस्कारों के रूप में वंशानुक्रम से प्राप्त करता है। ये संस्कार अच्छे और बुरे दोनों हो सकते हैं।
वैदिक विचारधारा मे मनुष्य जन्म का उद्देश्य शुभ संस्कारों द्वारा अन्त: एवं बाह्य दोनों प्रकार के मैलो को धोना है,उसे निखारते जाना है। पिछला मैल कैसे धोया जाए और नया रंग कैसे चढ़ाया जाए यह सब कुछ इस मनुष्य जन्म के संस्कारो द्वारा हो सकता है। संस्कारों की वैदिक विचारधारा आत्मा के शरीर धारण से लेकर तब तक चलती रहती है जबतक ‘आत्मतत्व’ शरीर को छोड़कर फिर तिरोहित नहीं हो जाता। यदि शुभ संस्कारों की व्यवस्था नहीं होगी तो अशुभ संस्कार तो स्वत: पड़ने की प्रतीक्षा भर कर रहे होते हैं।


यह हमारी #प्रतिकार शक्ति कहलाएगी‌। जैसे किसी बीमारी की लागत उसी को जल्दी लगती है जिसकी प्रतिकार शक्ति (Immune System) कमजोर है। यह संस्कार रुपी प्रतिकार शक्ति बढाने के लिए संस्कारो की औषधी लेना जरूरी है वरना हम जीवन भर कुसंस्कारों जैसी बीमारी से ग्रस्त ही रहेंगे।
जैसे ही हम संस्कारो से शिथिल हुए,वे अशुभ संस्कार अपना प्रभाव और प्रताप दिखाने लगते हैं। अंत: हमारे ऋषियों और मुनियों द्वारा मनुष्य जीवन के बीजवपन और अंकुरण से लेकर मृत्यु पर्यन्त अर्थात गर्भाधान संस्कार से अंत्येष्टि संस्कार तक की व्यवस्था सुनिश्चित की गयी है।


मनुष्य जीवन और आत्मा को उन्नत करने के लिए मंत्रोच्चारण पूर्वक यथाविधी गर्भाधान से लेकर अंत्येष्टि तक सोलह संस्कारों की जानकारी आपको आगे दी जाएगी। मंत्रोच्चारण का सही विज्ञान और महत्व भी आगे स्पष्ट किया जाएगा।

वर्तमान परिस्थिति को सुधारने के लिए यह एक शुरुआत है,यह सभी के सहयोग से ही संभव है।
इसलिए ऐसे संदेश ज्यादा से ज्यादा प्रसारित होना आवश्यक है।
जयतु सनातन 🚩
जय हिन्द 🚩🚩

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